Achchhe din ane wale hain

फ़ाग चलना बंद हुआ ,
अब छा गयी महंगाई !
गरीब अब करेगा रोज़ एक नयी लड़ाई !
प्याज़, टमाटर, मिरची ने कर दी है चढ़ाई !
बिन सब्ज़ी सुन पड़ेगी गरीबों की कढ़ाई !
उधर शाहब कहते-कहते थक गये,
गरीबी नहीं गरीब को मिटाने वाले हैं !
अरे सबर करो भैया,
बस अच्छे दिन आने वाले हैं !!
           कर लो जितना करना हो महंगा,
           ईंट ,बालू ,सरिया ,पत्थर ,
           हम सबको आवास दिला देंगे !
           भाई बहनो कहकर सर,
           फेंककर घर बनवा देंगे !
            मिलाओ सुर से सुर इनके तो ठीक,
            विरोधी हवालात जाने वाले हैं !
            थोड़ा ठहरो भैया,
            अब तो अच्छे दिन आने वाले हैं!!
जैसे- तैसे झेली थी नोटबंदी,
अब जीएसटी समझ से परे है !
सभी चिल्ला रहे विकास रुक गया,
साहब तो कहते की सोलह आने खरे हैं !
जो समझा नहीं अभी उसकी कक्षा,
सर अलग लगाने वाले हैं !
सबर करो भाइयों,
अच्छे दिन आने वाले हैं !!
       कहीं किसान मरें तो क्या?
       कौन सी बात बड़ी है ?
       इन्हें तो अभी फुर्सत नहीं,
      अभी २०१९ की जो पड़ी है !
      मानवता की कर निर्मम हत्या,
      सच को बलि चढाने वाले हैं !
      सच कहता हूँ देखना,
     अब अच्छे दिन आने वाले हैं !!!!! किशन राज 
      
      

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